हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.28.1

मंडल 7 → सूक्त 28 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 28
ब्रह्मा॑ ण इ॒न्द्रोप॑ याहि वि॒द्वान॒र्वाञ्च॑स्ते॒ हर॑यः सन्तु यु॒क्ताः । विश्वे॑ चि॒द्धि त्वा॑ वि॒हव॑न्त॒ मर्ता॑ अ॒स्माक॒मिच्छृ॑णुहि विश्वमिन्व ॥ (१)
हे इंद्र! तुम जानते हुए हमारी स्तुतियों के समीप आओ. तुम्हारे घोड़े हमारे सामने ही रथ में जुड़े हैं. हे सबको प्रसन्न करने वाले इंद्र! यद्यपि तुम्हें सभी लोग बुलाते हैं, फिर भी तुम हमारी पुकार सुनो. (१)
O Indra! Come near to Our praises knowing you. Your horses are attached in the chariot right in front of us. O Indra who pleases everyone! Though you are called by all people, you must hear Our call. (1)