हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.3.6

मंडल 7 → सूक्त 3 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 3
सु॒सं॒दृक्ते॑ स्वनीक॒ प्रती॑कं॒ वि यद्रु॒क्मो न रोच॑स उपा॒के । दि॒वो न ते॑ तन्य॒तुरे॑ति॒ शुष्म॑श्चि॒त्रो न सूरः॒ प्रति॑ चक्षि भा॒नुम् ॥ (६)
हे शोभनतेज वाले अग्नि! तुम जिस समय सूर्य के समान हमारे पास विशेषरूप से चमकते हो. उस समय तुम्हारा रूप भली-भांति दर्शनीय होता है. तुम्हारा तेज स्वर्ग से वज्र के समान निकलता है. तुम सुंदर सूर्य के समान अपना प्रकाश फैलाते हो. (६)
These are the agnis of adornment! The time when you shine especially near us like the sun. At that time your appearance is well-known. Your brightness comes out of heaven like a thunderbolt. You spread your light like the beautiful sun. (6)