हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.34.15

मंडल 7 → सूक्त 34 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 34
स॒जूर्दे॒वेभि॑र॒पां नपा॑तं॒ सखा॑यं कृध्वं शि॒वो नो॑ अस्तु ॥ (१५)
हे स्तोताओ! जल के पुत्र अग्नि को देवों के साथ अपना मित्र बनाओ. वे हमारे लिए कल्याणकारी हों. (१५)
This stotao! Make Fire, the son of water, your friend with the gods. Let them be good for us. (15)