हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.41.5

मंडल 7 → सूक्त 41 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
भग॑ ए॒व भग॑वाँ अस्तु देवा॒स्तेन॑ व॒यं भग॑वन्तः स्याम । तं त्वा॑ भग॒ सर्व॒ इज्जो॑हवीति॒ स नो॑ भग पुरए॒ता भ॑वे॒ह ॥ (५)
हे देवो! भग ही धनवान्‌ हों. उसी धन से हम भी धनवान्‌ हों. हे भग! सब लोग तुम्हें बार-बार बुलाते हैं. इस यज्ञ में तुम हमारे अनुगामी बनो. (५)
Oh, God! Let the clitoris be rich. With that money, we are rich too. Oh, God! Everyone calls you again and again. In this yajna you become our followers. (5)