ऋग्वेद (मंडल 7)
वास्तो॑ष्पते श॒ग्मया॑ सं॒सदा॑ ते सक्षी॒महि॑ र॒ण्वया॑ गातु॒मत्या॑ । पा॒हि क्षेम॑ उ॒त योगे॒ वरं॑ नो यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (३)
हे वास्तोष्पति! हम तुम्हारे सुखकारक, सुंदर एवं संपत्तियुक्त स्थान से संगत हों. तुम हमारे प्राप्त एवं अप्राप्त धन की रक्षा करो. हे देवो! तुम अपने कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (३)
This is the realist! May we be compatible with your pleasant, beautiful and wealthy place. You protect our received and unaccounted money. Oh, God! You protect us forever by your welfare means. (3)