हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.55.1

मंडल 7 → सूक्त 55 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 55
अ॒मी॒व॒हा वा॑स्तोष्पते॒ विश्वा॑ रू॒पाण्या॑वि॒शन् । सखा॑ सु॒शेव॑ एधि नः ॥ (१)
हे रोगनाशक वास्तोष्पति! तुम समस्त रूपों में प्रवेश करते हुए हमारे सखा एवं सुखदायक बनकर बढ़ो. (१)
This is a disease-killer! You enter into all forms and grow up as our friend and soothing. (1)