ऋग्वेद (मंडल 7)
प्रि॒या वो॒ नाम॑ हुवे तु॒राणा॒मा यत्तृ॒पन्म॑रुतो वावशा॒नाः ॥ (१०)
हे शीघ्रता करने वाले मरुतो! तुम्हारे प्यारे नाम हम पुकारते हैं. अभिलाषापूरक मरुद्गण इससे तृप्त होते हैं. (१०)
O you who hurry, Maruto! Your beloved name we call. The desireful deserts are satisfied with it. (10)