हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.56.16

मंडल 7 → सूक्त 56 → श्लोक 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 56
अत्या॑सो॒ न ये म॒रुतः॒ स्वञ्चो॑ यक्ष॒दृशो॒ न शु॒भय॑न्त॒ मर्याः॑ । ते ह॑र्म्ये॒ष्ठाः शिश॑वो॒ न शु॒भ्रा व॒त्सासो॒ न प्र॑क्री॒ळिनः॑ पयो॒धाः ॥ (१६)
जो मरुद्गण सतत गतिशील घोड़े के समान शोभनगति वाले, उत्सव देखने वाले, मनुष्यों के समान शोभाशाली एवं घर में रहने वाले बच्चों के समान शोभित हैं, वे खेलते हुए बालकों के समान एवं जल धारणकर्तता हैं. (१६)
The deserts, who are as well-versed as a constantly moving horse, who see festivals, are as glorious as human beings, and as well as children living in the house, they are like children playing and holding water. (16)