हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.56.19

मंडल 7 → सूक्त 56 → श्लोक 19 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 56
इ॒मे तु॒रं म॒रुतो॑ रामयन्ती॒मे सहः॒ सह॑स॒ आ न॑मन्ति । इ॒मे शंसं॑ वनुष्य॒तो नि पा॑न्ति गु॒रु द्वेषो॒ अर॑रुषे दधन्ति ॥ (१९)
ये मरुद्गण शीपघ्रतापूर्वक यज्ञ करने वाले यजमान को प्रसन्न करते हैं एवं शक्तिशाली लोगों को शक्ति द्वारा झुकाते हैं. ये स्तोता को हिंसकों से बचाते हैं, पर हव्य न देने वाले मनुष्य के प्रति बहुत द्वेष रखते हैं. (१९)
These deserts happily appease the host who performs the yajna with great pride and bow down to the powerful by power. They protect the stota from the violent, but have great hatred for the man who does not give the right. (19)