ऋग्वेद (मंडल 7)
अ॒स्मे वी॒रो म॑रुतः शु॒ष्म्य॑स्तु॒ जना॑नां॒ यो असु॑रो विध॒र्ता । अ॒पो येन॑ सुक्षि॒तये॒ तरे॒माध॒ स्वमोको॑ अ॒भि वः॑ स्याम ॥ (२४)
हे मरुतो! हमारा पुत्र शक्तिशाली हो. वह बुद्धिमान् एवं शत्रुओं को सहन करने वाला हो. हम शोभननिवास पाने के लिए उसकी सहायता से शन्रुओं को वश में करेंगे एवं तुम्हारी आत्मीयता का स्थान प्राप्त करेंगे. (२४)
O Maruto! Our son is powerful. He is wise and bears enemies. We will subdue the Shanrus with his help to gain comfort and get the place of your intimacy. (24)