हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.58.4

मंडल 7 → सूक्त 58 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 58
यु॒ष्मोतो॒ विप्रो॑ मरुतः शत॒स्वी यु॒ष्मोतो॒ अर्वा॒ सहु॑रिः सह॒स्री । यु॒ष्मोतः॑ स॒म्राळु॒त ह॑न्ति वृ॒त्रं प्र तद्वो॑ अस्तु धूतयो दे॒ष्णम् ॥ (४)
हे मरुतो! तुम्हारे द्वारा रक्षित स्तोता सैकड़ों धनों का स्वामी होता है. तुम्हारी रक्षा पाकर वह आक्रमण करने वाला, शत्रु-पराजयकारी, साहसी एवं हजारों धनों का स्वामी बनता है. तुम्हारे द्वारा रक्षित होकर वह सम्राट्‌ एवं शन्रुहंता बनता है. हे कंपाने वाले मरुतो! तुम्हारा दिया हुआ धन बढ़े. (४)
O Maruto! The stota you protect is the owner of hundreds of riches. By protecting you, he becomes an invader, an enemy-defeater, a courageous man and a master of thousands of riches. Protected by you, he becomes emperor and shanruhanta. O you who tremble, Marutto! Increase the money you've given. (4)