ऋग्वेद (मंडल 7)
प्र स॒म्राजो॒ असु॑रस्य॒ प्रश॑स्तिं पुं॒सः कृ॑ष्टी॒नाम॑नु॒माद्य॑स्य । इन्द्र॑स्येव॒ प्र त॒वस॑स्कृ॒तानि॒ वन्दे॑ दा॒रुं वन्द॑मानो विवक्मि ॥ (१)
मैं शत्रुनगरियों को नष्ट करने वाले की वंदना करता हूं. मैं वंदना करता हुआ सारे लोक के स्वामी, बलवान्, वीर एवं प्रजाओं के स्तुतियोग्य और बलवान् इंद्र के समान वैश्वानर अग्नि के कर्मो एवं स्तुतियों को कहता हूं. (१)
I worship those who destroy the enemy cities. I worship the lords of all the people, the balwans, the heroes and the praises of the people and the praises of the people, and like the strong Indra, the deeds and praises of the Vaishnavar Agni. (1)
ऋग्वेद (मंडल 7)
क॒विं के॒तुं धा॒सिं भा॒नुमद्रे॑र्हि॒न्वन्ति॒ शं रा॒ज्यं रोद॑स्योः । पु॒रं॒द॒रस्य॑ गी॒र्भिरा वि॑वासे॒ऽग्नेर्व्र॒तानि॑ पू॒र्व्या म॒हानि॑ ॥ (२)
देव प्राज्ञ, केतुरूप, पर्वत धारण करने वाले, दीप्तियुक्त करने वाले, सुखकर एवं धरती- आकाश के राजा अग्नि को प्रसन्न करते हैं. मैं स्तुति द्वारा शत्रुनगरियों को नष्ट करने वाले अग्नि के प्राचीन एवं महान् कार्यो को स्तुतिवचनों द्वारा गाता हूं. (२)
God pragya, keturup, mountain-possessor, the brighter, the happier and the king of the earth- the sky pleases agni. I sing through hymns of praise to the ancient and great works of agni that destroy enemy cities. (2)
ऋग्वेद (मंडल 7)
न्य॑क्र॒तून्ग्र॒थिनो॑ मृ॒ध्रवा॑चः प॒णीँर॑श्र॒द्धाँ अ॑वृ॒धाँ अ॑य॒ज्ञान् । प्रप्र॒ तान्दस्यू॑ँर॒ग्निर्वि॑वाय॒ पूर्व॑श्चका॒राप॑रा॒ँ अय॑ज्यून् ॥ (३)
अग्नि यज्ञ न करने वाले, केवल बातें करने वाले, वचनों द्वारा हिंसा करने वाले, श्रद्धारहित व स्तुतियों द्वारा वृद्धि न करने वाले प्राणियों को दूर भगावें एवं प्रमुख बनकर अन्य यज्ञशून्यों को नीचा बनावें. (३)
Drive away those who do not perform agni yajna, who only talk, who do violence by words, who do not increase by faith and praise, and become the chief and let down other yajnashonyas. (3)
ऋग्वेद (मंडल 7)
यो अ॑पा॒चीने॒ तम॑सि॒ मद॑न्तीः॒ प्राची॑श्च॒कार॒ नृत॑मः॒ शची॑भिः । तमीशा॑नं॒ वस्वो॑ अ॒ग्निं गृ॑णी॒षेऽना॑नतं द॒मय॑न्तं पृत॒न्यून् ॥ (४)
जिन अतिशय नेता अनिने ने प्रकाशरहित अंधकार में पड़ी प्रजाओं को प्रसन्न करके अपनी बुद्धि से सरलपथगामिनी बनाया, मैं उन्हीं धनस्वामी तथा नम्रतारहित एवं युद्धाभिलाषियों का दमन करने वाले अग्नि की स्तुति करता हूं. (४)
I praise the same richesman and the agni that oppressed the unequivocal and the warlords who made the people in darkness without light by pleasing them with simple pathgamini with their wisdom. (4)
ऋग्वेद (मंडल 7)
यो दे॒ह्यो॒३॒॑ अन॑मयद्वध॒स्नैर्यो अ॒र्यप॑त्नीरु॒षस॑श्च॒कार॑ । स नि॒रुध्या॒ नहु॑षो य॒ह्वो अ॒ग्निर्विश॑श्चक्रे बलि॒हृतः॒ सहो॑भिः ॥ (५)
जिन अग्नि ने आसुरी विद्याओं को आयुधों द्वारा हीन बनाया है एवं सूर्यपत्नी उषा को उत्पन्न किया है, उन्हीं महान् अग्नि ने बल द्वारा प्रजाओं को रोककर राजा नहुष को कर देने वाला बनाया था. (५)
The same great agni which has made the asuris scholars inferior to the armaments and has produced the surya-wife Usha, the same great agni had stopped the people by force and made King Nahush a tax-giver. (5)
ऋग्वेद (मंडल 7)
यस्य॒ शर्म॒न्नुप॒ विश्वे॒ जना॑स॒ एवै॑स्त॒स्थुः सु॑म॒तिं भिक्ष॑माणाः । वै॒श्वा॒न॒रो वर॒मा रोद॑स्यो॒राग्निः स॑साद पि॒त्रोरु॒पस्थ॑म् ॥ (६)
सभी मनुष्य सुखप्राप्ति के निमित्त जिस वैश्वानर अग्नि की कृपा की प्रार्थना करते हुए हव्यों एवं कमा के साथ उपस्थित होते हैं, वे ही अपने माता-पिता के समान स्वर्ग और धरती के बीच में उपस्थित अंतरिक्ष में आए थे. (६)
All the human beings, who are present with the greetings and the earners while praying for the grace of the Divine Fire for the sake of happiness, came to the space between heaven and earth like their parents. (6)
ऋग्वेद (मंडल 7)
आ दे॒वो द॑दे बु॒ध्न्या॒३॒॑ वसू॑नि वैश्वान॒र उदि॑ता॒ सूर्य॑स्य । आ स॑मु॒द्रादव॑रा॒दा पर॑स्मा॒दाग्निर्द॑दे दि॒व आ पृ॑थि॒व्याः ॥ (७)
सूर्य निकल आने पर वैश्वानर अग्नि अंतरिक्ष के अंधकार को ले लेते हैं. वे अंतरिक्ष, धरती एवं स्वर्ग से भी अंधकार ले लेते हैं. (७)
When the sun comes out, the Vaishnavar agnis take over the darkness of space. They take darkness from space, earth and even from heaven. (7)