हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.60.10

मंडल 7 → सूक्त 60 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 60
स॒स्वश्चि॒द्धि समृ॑तिस्त्वे॒ष्ये॑षामपी॒च्ये॑न॒ सह॑सा॒ सह॑न्ते । यु॒ष्मद्भि॒या वृ॑षणो॒ रेज॑माना॒ दक्ष॑स्य चिन्महि॒ना मृ॒ळता॑ नः ॥ (१०)
इन मित्रादि देवों की संगति निगूऴ एवं दीप्त होती है. वे अपने छिपे हुए बल से शत्रुओं को पराजित करते हैं. हे अभिलाषापूरक मित्रादि देवो! हमारे विरोधी तुम्हारे डर से कांप जाते हैं. तुम अपने बल के महत्त्व से हमें सुखी बनाओ. (१०)
The fellowship of these friendly deities is niguā and glowing. They defeat the enemies with their hidden force. O wishing friend! Our opponents tremble at your fear. Make us happy with the importance of your strength. (10)