ऋग्वेद (मंडल 7)
उद्वां॑ पृ॒क्षासो॒ मधु॑मन्तो अस्थु॒रा सूर्यो॑ अरुहच्छु॒क्रमर्णः॑ । यस्मा॑ आदि॒त्या अध्व॑नो॒ रद॑न्ति मि॒त्रो अ॑र्य॒मा वरु॑णः स॒जोषाः॑ ॥ (४)
हे मित्र व वरुण! तुम दोनों के लिए अन्न एवं मीठे पुरोडाश तैयार किए गए थे. सूर्य दीप्तिशाली अंतरिक्ष में आरोहण करते हैं एवं मित्र, अर्यमा व वरुण समान प्रीति वाले होकर उनके लिए मार्ग निश्चित करते हैं. (४)
Oh my friend and Varun! Food and sweet purodash were prepared for both of you. The Sun ascends into the bright space and friends, Aryama and Varuna, having equal love, decide the way for them. (4)