हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.60.6

मंडल 7 → सूक्त 60 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 60
इ॒मे मि॒त्रो वरु॑णो दू॒ळभा॑सोऽचे॒तसं॑ चिच्चितयन्ति॒ दक्षैः॑ । अपि॒ क्रतुं॑ सु॒चेत॑सं॒ वत॑न्तस्ति॒रश्चि॒दंहः॑ सु॒पथा॑ नयन्ति ॥ (६)
ये आदित्य, मित्र और वरुण किसी से हारने वाले नहीं हैं. ये अपनी शक्ति से ज्ञानरहित को भीज्ञानी बना देते हैं एवं यज्ञकर्ता तथा शोभनज्ञान वाले के पास पहुंचकर उसके पाप का नाश करते हुए उत्तम मार्ग पर ले जाते हैं. (६)
These Aditya, friends and Varun are not going to lose to anyone. They make the unscientific by their power and approach the yajnakar and the one who is blessed with knowledge and lead them to the best path, destroying his sin. (6)