हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.64.1

मंडल 7 → सूक्त 64 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
दि॒वि क्षय॑न्ता॒ रज॑सः पृथि॒व्यां प्र वां॑ घृ॒तस्य॑ नि॒र्णिजो॑ ददीरन् । ह॒व्यं नो॑ मि॒त्रो अ॑र्य॒मा सुजा॑तो॒ राजा॑ सुक्ष॒त्रो वरु॑णो जुषन्त ॥ (१)
हे मित्र व वरुण! तुम अंतरिक्ष एवं पृथ्वी में व्याप्त जल के स्वामी हो. तुम्हारी प्रेरणा से मेघ जल को रूप देता है. हमारे हव्य को मित्र, शोभनजन्म वाले अर्यमा, राजा एवं शोभनशक्ति वाले वरुण स्वीकार करें. (१)
Oh my friend and Varun! You are the master of space and the water in the earth. Cloud from your inspiration gives form to water. Accept our heart as friends, Aryama with Shobhanjanam, Raja and Varun with Shobhan shakti. (1)