ऋग्वेद (मंडल 7)
वि ये द॒धुः श॒रदं॒ मास॒मादह॑र्य॒ज्ञम॒क्तुं चादृच॑म् । अ॒ना॒प्यं वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा क्ष॒त्रं राजा॑न आशत ॥ (११)
मित्र, वरुण एवं अर्यमा ने सुशोभित होकर दूसरों द्वारा अप्राप्त बल पाया है तथा संवत्सर, मास, दिवस, रात्रि एवं ऋचाओं की रचना की है. (११)
Friends, Varuna and Aryama have been adorned and have found the strength of others unstained and have composed samvatsars, months, days, nights and rituals. (11)