हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
प्र मि॒त्रयो॒र्वरु॑णयोः॒ स्तोमो॑ न एतु शू॒ष्यः॑ । नम॑स्वान्तुविजा॒तयोः॑ ॥ (१)
बार-बार प्रादुर्भूत होने वाले मित्र एवं वरुण का सुखदाता तथा अन्नयुक्त स्तोत्र उनके समीप जावे. (१)
Go to him a happy and grained hymn of a friend and Varuna who is repeatedly born. (1)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
या धा॒रय॑न्त दे॒वाः सु॒दक्षा॒ दक्ष॑पितरा । अ॒सु॒र्या॑य॒ प्रम॑हसा ॥ (२)
शोभन-बलयुक्त, शक्ति की रक्षा करने वाले एवं प्रकृष्ट तेज वाले मित्र व वरुण को देवों ने धारण किया है. (२)
The god has ensconced, the protector of power and the friend of the strongest and the one who has great speed and Varuna. (2)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
ता नः॑ स्ति॒पा त॑नू॒पा वरु॑ण जरितॄ॒णाम् । मित्र॑ सा॒धय॑तं॒ धियः॑ ॥ (३)
वे दोनों हमारे घर एवं शरीर के रक्षक हैं. हे मित्र व वरुण! तुम स्तोताओं के स्तुतिरूप कर्म को पूरा करो. (३)
They are both the protectors of our home and body. Oh my friend and Varun! You complete the deeds as a token of praise to the psalms. (3)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
यद॒द्य सूर॒ उदि॒तेऽना॑गा मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । सु॒वाति॑ सवि॒ता भगः॑ ॥ (४)
पापहंता मित्र, अर्यमा, सविता एवं भग आज सूर्य निकलने पर हमारा इष्ट धन दें. (४)
Papahanta Friends, Aryama, Savita and Bhaga give us the favored wealth when the sun comes out today. (4)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
सु॒प्रा॒वीर॑स्तु॒ स क्षयः॒ प्र नु याम॑न्सुदानवः । ये नो॒ अंहो॑ऽति॒पिप्र॑ति ॥ (५)
हे शोभनदान वाले देवो! तुम्हारे आने पर हमारा निवास-स्थान सुरक्षित हो. तुम हमारे पाप को नष्ट करो. (५)
O god of adornment! May our place of residence be safe when you come. You destroy our sin. (5)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
उ॒त स्व॒राजो॒ अदि॑ति॒रद॑ब्धस्य व्र॒तस्य॒ ये । म॒हो राजा॑न ईशते ॥ (६)
मित्रादि देव एवं अदिति हिंसा-रहित यज्ञ के स्वामी हैं. वे धन के भी स्वामी हैं. (६)
Mitradi Dev and Aditi are the masters of violence-free yagnas. They are also the masters of wealth. (6)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
प्रति॑ वां॒ सूर॒ उदि॑ते मि॒त्रं गृ॑णीषे॒ वरु॑णम् । अ॒र्य॒मणं॑ रि॒शाद॑सम् ॥ (७)
मैं सूर्योदय वेर बाद मित्र, वरुण एवं शत्रुनाशक अर्यमा की स्तुति करता हूं. (७)
I praise friend, Varuna and the enemy-destroyer Aryama after sunrise. (7)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
रा॒या हि॑रण्य॒या म॒तिरि॒यम॑वृ॒काय॒ शव॑से । इ॒यं विप्रा॑ मे॒धसा॑तये ॥ (८)
यह स्तुति हमें रमणीय धन के सथ अपराजित शक्ति देने वाली हो. हे ब्राह्मणो! यह स्तुति यज्ञ-लाभ के लिए हो. (८)
May this praise give us undefeated power with delightful wealth. O Brahmins! This praise be for yajna-gain. (8)
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