ऋग्वेद (मंडल 7)
सु॒प्रा॒वीर॑स्तु॒ स क्षयः॒ प्र नु याम॑न्सुदानवः । ये नो॒ अंहो॑ऽति॒पिप्र॑ति ॥ (५)
हे शोभनदान वाले देवो! तुम्हारे आने पर हमारा निवास-स्थान सुरक्षित हो. तुम हमारे पाप को नष्ट करो. (५)
O god of adornment! May our place of residence be safe when you come. You destroy our sin. (5)