हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.66.5

मंडल 7 → सूक्त 66 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
सु॒प्रा॒वीर॑स्तु॒ स क्षयः॒ प्र नु याम॑न्सुदानवः । ये नो॒ अंहो॑ऽति॒पिप्र॑ति ॥ (५)
हे शोभनदान वाले देवो! तुम्हारे आने पर हमारा निवास-स्थान सुरक्षित हो. तुम हमारे पाप को नष्ट करो. (५)
O god of adornment! May our place of residence be safe when you come. You destroy our sin. (5)