हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.71.1

मंडल 7 → सूक्त 71 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 71
अप॒ स्वसु॑रु॒षसो॒ नग्जि॑हीते रि॒णक्ति॑ कृ॒ष्णीर॑रु॒षाय॒ पन्था॑म् । अश्वा॑मघा॒ गोम॑घा वां हुवेम॒ दिवा॒ नक्तं॒ शरु॑म॒स्मद्यु॑योतम् ॥ (१)
रात अपनी बहिन उषा के पास से हट जाती है. काली रात उजले दिन के लिए रास्ता छोड़ती है. हे अश्व एवं गोरूप धनों के स्वामी अश्विनीकुमारो! हम तुम्हें बुलाते हैं. तुम रात- दिन हमारे पास से शत्रुओं को दूर करो. (१)
The night turns away from his sister Usha. The black night leaves way for the bright day. O Ashwanikumaro, lord of the horse and gorup wealth! We call you. You remove the enemies from us day and night. (1)