हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.71.2

मंडल 7 → सूक्त 71 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 71
उ॒पाया॑तं दा॒शुषे॒ मर्त्या॑य॒ रथे॑न वा॒मम॑श्विना॒ वह॑न्ता । यु॒यु॒तम॒स्मदनि॑रा॒ममी॑वां॒ दिवा॒ नक्तं॑ माध्वी॒ त्रासी॑थां नः ॥ (२)
हे अश्चिनीकुमारो! तुम अपने रथ द्वारा हव्य देने वाले यजमान के लिए उत्तम धन लाते हुए आओ एवं अन्न की कमी और रोग हमसे दूर रहे. मधुस्वामी अश्विनीकुमारो! तुम रात-दिन हमारी रक्षा करो. (२)
O aschinikumaro! You may bring the best money to the host who gives the havya through your chariot and let the shortage of food and disease be away from us. Madhuswamy Ashwinikumaro! You protect us day and night. (2)