ऋग्वेद (मंडल 7)
आ गोम॑ता नासत्या॒ रथे॒नाश्वा॑वता पुरुश्च॒न्द्रेण॑ यातम् । अ॒भि वां॒ विश्वा॑ नि॒युतः॑ सचन्ते स्पा॒र्हया॑ श्रि॒या त॒न्वा॑ शुभा॒ना ॥ (१)
हे अश्विनीकुमारो! तुम गो, अश्व एवं धन से संपन्न रथ के द्वारा आओ. बहुत सी स्तुतियां तुम्हारी सेवा करती हैं. तुम चाहने योग्य शोभा एवं शरीर से युक्त हो. (१)
O Ashwinikumaro! You come by a chariot full of go, horse and wealth. Many praises serve you. You are full of desired splendor and body. (1)