हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.76.4

मंडल 7 → सूक्त 76 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 76
त इद्दे॒वानां॑ सध॒माद॑ आसन्नृ॒तावा॑नः क॒वयः॑ पू॒र्व्यासः॑ । गू॒ळ्हं ज्योतिः॑ पि॒तरो॒ अन्व॑विन्दन्स॒त्यम॑न्त्रा अजनयन्नु॒षास॑म् ॥ (४)
जिन सत्ययुक्त, क्रांतदर्शी व पूर्वकाल में उत्पन्न पितरों ने अंधकार से ढके तेज को प्राप्त किया एवं सत्यमत्र शक्ति वाला बनकर उषाओं को उत्पन्न किया, वे देवों के साथ-साथ प्रमुदित होते थे. (४)
The true, revolutionary and ancient fathers who attained the radiance covered with darkness and created the ushas by becoming satyamattra shakti, were merry along with the gods. (4)