ऋग्वेद (मंडल 7)
स॒मा॒न ऊ॒र्वे अधि॒ संग॑तासः॒ सं जा॑नते॒ न य॑तन्ते मि॒थस्ते । ते दे॒वानां॒ न मि॑नन्ति व्र॒तान्यम॑र्धन्तो॒ वसु॑भि॒र्याद॑मानाः ॥ (५)
वे पितर पणि द्वारा चुराई गायों को प्राप्त करने हेतु मिले थे एवं एक निश्चय पर पहुंचे थे. क्या उन्होंने मिलकर यत्न नहीं किया था? अर्थात् अवश्य किया था. वे देवसंबंधी यज्ञकर्मों का विनाश नहीं करते थे एवं हित न करते हुए उषा के वासदाता तेजों से मिलते थे. (५)
They had met to get the cows stolen by the father's pany and arrived at a decision. Didn't they work together? i.e. did it. They did not destroy the devrelated yajnakarmas and did not meet usha's vasdata tejas without doing good. (5)