ऋग्वेद (मंडल 7)
यां त्वा॑ दिवो दुहितर्व॒र्धय॒न्त्युषः॑ सुजाते म॒तिभि॒र्वसि॑ष्ठाः । सास्मासु॑ धा र॒यिमृ॒ष्वं बृ॒हन्तं॑ यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (६)
हे शोभनजन्म वाली स्वर्गपुत्री उषा! हम वसिष्ठगोत्रीय लोग तुम्हें स्तुतियों द्वारा बढ़ाते हैं. तुम हमें प्रदीप्त एवं महान् धन दो. हे देवो! कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (६)
O heavenly daughter of Shobhanjanam Usha! We vasishthagoras raise you up with praises. You give us light and great wealth. Oh, God! Protect us forever by means of welfare. (6)