ऋग्वेद (मंडल 7)
उपो॑ रुरुचे युव॒तिर्न योषा॒ विश्वं॑ जी॒वं प्र॑सु॒वन्ती॑ च॒रायै॑ । अभू॑द॒ग्निः स॒मिधे॒ मानु॑षाणा॒मक॒र्ज्योति॒र्बाध॑माना॒ तमां॑सि ॥ (१)
यौवनप्राप्त नारी के समान उषा समस्त जीवों को संचार के लिए प्रेरित करती हुई सूर्य के पास प्रकाशित होती है. अग्नि मनुष्यों द्वारा प्रज्वलित करने योग्य हुए हैं एवं अंधकार मिटाने वाला प्रकाश फैलाते हैं. (१)
Like a young woman, Usha is illuminated near the sun, inspiring all living beings to communicate. Fire has been ignited by humans and spreads light that erases darkness. (1)
ऋग्वेद (मंडल 7)
विश्वं॑ प्रती॒ची स॒प्रथा॒ उद॑स्था॒द्रुश॒द्वासो॒ बिभ्र॑ती शु॒क्रम॑श्वैत् । हिर॑ण्यवर्णा सु॒दृशी॑कसंदृ॒ग्गवां॑ मा॒ता ने॒त्र्यह्ना॑मरोचि ॥ (२)
सब ओर से सुडौल उषा सबके सामने उदित है एवं उज्ज्वल तेज को धारण करके बढ़ रही है. सुनहरे रंग वाली, देखने योग्य तेज वाली, वाणियों की माता एवं दिनों की नेत्री उषा सुशोभित है. (२)
From all sides, the curvy Usha is rising in front of everyone and is growing up by holding on to the bright fast. The golden-coloured, the seeable, the bright, the mother of the vanis and the leader of the day, Usha, is adorned. (2)
ऋग्वेद (मंडल 7)
दे॒वानां॒ चक्षुः॑ सु॒भगा॒ वह॑न्ती श्वे॒तं नय॑न्ती सु॒दृशी॑क॒मश्व॑म् । उ॒षा अ॑दर्शि र॒श्मिभि॒र्व्य॑क्ता चि॒त्राम॑घा॒ विश्व॒मनु॒ प्रभू॑ता ॥ (३)
देवों की आंख के समान तेज धारण करने वाली, सुंदरी, अपनी किरणों से प्रकाशित विचित्र धन वाली एवं जगद्व्यवहार के लिए उन्नत उषा सुदर्शन सूर्य को श्वेत करती हुई दिखाई दे रही है. (३)
Wearing as sharp as the eyes of the gods, Sundari, with the strange wealth illuminated by her rays and the advanced usha sudarshan for jagadvadha, is seen whitening the sun. (3)
ऋग्वेद (मंडल 7)
अन्ति॑वामा दू॒रे अ॒मित्र॑मुच्छो॒र्वीं गव्यू॑ति॒मभ॑यं कृधी नः । या॒वय॒ द्वेष॒ आ भ॑रा॒ वसू॑नि चो॒दय॒ राधो॑ गृण॒ते म॑घोनि ॥ (४)
हे उषा! तुम हमारे समीप धनयुक्त एवं शत्रु को दूर करती हुई प्रकाश करो. हमारी विस्तृत गोचर धरती को भयरहित बनाओ. शत्रुओं को अलग करो एवं शत्रुओं के धन हमें दो. हे धनस्वामिनी उषा! स्तोता के पास आने के लिए धन को प्रेरणा दो. (४)
Oh, Usha! Make light with us, the rich and the enemy away. Make our vast earth free from fear. Separate the enemies and give us the riches of the enemies. O dhanswamini usha! Inspire wealth to come to The Stota. (4)
ऋग्वेद (मंडल 7)
अ॒स्मे श्रेष्ठे॑भिर्भा॒नुभि॒र्वि भा॒ह्युषो॑ देवि प्रति॒रन्ती॑ न॒ आयुः॑ । इषं॑ च नो॒ दध॑ती विश्ववारे॒ गोम॒दश्वा॑व॒द्रथ॑वच्च॒ राधः॑ ॥ (५)
हे उषादेवी! तुम हमारी आयु बढ़ाती हुई हमारे सामने उत्तम किरणों के साथ प्रकाशयुक्त बनो. हे सबकी कमनीया उषा! हमारे लिए अन्न, गायों, अश्वों एवं रथों से युक्त धन धारण करती हुई प्रकाश करो. (५)
O Ushadevi! You be illuminated with the best rays in front of us while increasing our age. Hey sab sabki kamaniyya usha! Make light for us, holding wealth with food, cows, horses and chariots. (5)
ऋग्वेद (मंडल 7)
यां त्वा॑ दिवो दुहितर्व॒र्धय॒न्त्युषः॑ सुजाते म॒तिभि॒र्वसि॑ष्ठाः । सास्मासु॑ धा र॒यिमृ॒ष्वं बृ॒हन्तं॑ यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (६)
हे शोभनजन्म वाली स्वर्गपुत्री उषा! हम वसिष्ठगोत्रीय लोग तुम्हें स्तुतियों द्वारा बढ़ाते हैं. तुम हमें प्रदीप्त एवं महान् धन दो. हे देवो! कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (६)
O heavenly daughter of Shobhanjanam Usha! We vasishthagoras raise you up with praises. You give us light and great wealth. Oh, God! Protect us forever by means of welfare. (6)