हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.78.3

मंडल 7 → सूक्त 78 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 78
ए॒ता उ॒ त्याः प्रत्य॑दृश्रन्पु॒रस्ता॒ज्ज्योति॒र्यच्छ॑न्तीरु॒षसो॑ विभा॒तीः । अजी॑जन॒न्सूर्यं॑ य॒ज्ञम॒ग्निम॑पा॒चीनं॒ तमो॑ अगा॒दजु॑ष्टम् ॥ (३)
ये प्रसिद्ध, प्रभात करने वाली एवं तेज को बढ़ाने वाली उषाएं पूर्व दिशा में दिखाई देती हैं. उषाओं ने सूर्य, अग्नि और यज्ञ को जन्म दिया, जिससे नीचे जाने वाला एवं अप्रिय अंधकार नष्ट हो गया. (३)
These famous, morning-making and bright-enhancing rays are visible in the east direction. Ushas gave birth to Sun, Agni and Yagya, which destroyed the downward and unpleasant darkness. (3)