हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.78.5

मंडल 7 → सूक्त 78 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 78
प्रति॑ त्वा॒द्य सु॒मन॑सो बुधन्ता॒स्माका॑सो म॒घवा॑नो व॒यं च॑ । ति॒ल्वि॒ला॒यध्व॑मुषसो विभा॒तीर्यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (५)
हे उषा! हमारे शोभनमन वाले तथा धनस्वामी लोग एवं हम आज तुम्हें जगाते हैं. हे प्रभातकारिणी उषाओ! तुम संसार को स्नेहयुक्त कर दो. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (५)
Hey Usha! Our magnanimous and wealthy people and we wake you up today. Oh morning goddess! You make the world affectionate. O Gods! You always protect us by means of welfare. (5)