ऋग्वेद (मंडल 7)
प्रति॒ स्तोमे॑भिरु॒षसं॒ वसि॑ष्ठा गी॒र्भिर्विप्रा॑सः प्रथ॒मा अ॑बुध्रन् । वि॒व॒र्तय॑न्तीं॒ रज॑सी॒ सम॑न्ते आविष्कृण्व॒तीं भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ॥ (१)
वसिष्ठगोत्रीय विप्र स्तुतियों एवं मंत्रसमूहों द्वारा उषा को सभी लोगों से पहले जगाते हैं. उषा समान भागों वाली द्यावा-पृथिवी को ढक लेती है एवं सारे भुवनों को प्रकट करती है. (१)
Vasishthagotriya vipra awakens Usha before all the people through hymns and groups of mantras. Usha covers the dyava-prithvi with equal parts and reveals all the bhuvanas. (1)