हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.87.6

मंडल 7 → सूक्त 87 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 87
अव॒ सिन्धुं॒ वरु॑णो॒ द्यौरि॑व स्थाद्द्र॒प्सो न श्वे॒तो मृ॒गस्तुवि॑ष्मान् । ग॒म्भी॒रशं॑सो॒ रज॑सो वि॒मानः॑ सुपा॒रक्ष॑त्रः स॒तो अ॒स्य राजा॑ ॥ (६)
सूर्य के समान दीप्त, पानी की बूंद के समान श्वेत, हरिण के समान शक्तिशाली, महान्‌ स्तोत्रों वाले, जल के रचयिता, दुःख से छुटकारा दिलाने की शक्ति से युक्त एवं इस संसार के स्वामी वरुण ने सागर को स्थिर बनाया है. (६)
As bright as the sun, as white as a drop of water, as powerful as a deer, with great hymns, the creator of water, with the power to relieve sorrow and lord of this world, Varuna, has made the ocean stable. (6)