हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.96.3

मंडल 7 → सूक्त 96 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 96
भ॒द्रमिद्भ॒द्रा कृ॑णव॒त्सर॑स्व॒त्यक॑वारी चेतति वा॒जिनी॑वती । गृ॒णा॒ना ज॑मदग्नि॒वत्स्तु॑वा॒ना च॑ वसिष्ठ॒वत् ॥ (३)
कल्याण करने वाली सरस्वती हमारा कल्याण ही करें. शोभन गति वाली एवं अन्नस्वामिनी सरस्वती हम में बुद्धि उत्पन्न करें. मैं जमदग्नि के समान तुम्हारी स्तुति कर रहा हूं. तुम वसिष्ठ अर्थात्‌ मेरे उपर्युक्त स्तोत्र पाओ. (३)
The welfare-doer Saraswati should do our welfare. May the one with a good speed and the annaswamini Saraswati instill in us the wisdom. I am praising you like Jamdagni. You get Vasishtha i.e. my above mentioned hymns. (3)