ऋग्वेद (मंडल 7)
इन्द्रा॑विष्णू दृंहि॒ताः शम्ब॑रस्य॒ नव॒ पुरो॑ नव॒तिं च॑ श्नथिष्टम् । श॒तं व॒र्चिनः॑ स॒हस्रं॑ च सा॒कं ह॒थो अ॑प्र॒त्यसु॑रस्य वी॒रान् ॥ (५)
हे इंद्र एवं विष्णु! तुमने शंबर असुर की सुदृढ़ निन्यानवे नगरियों को समाप्त किया था. तुमने वर्चि नामक असुर के सैकड़ों और हजारों वीरों को नष्ट किया. (५)
O Indra and Vishnu! You had abolished the strong ninety-nine cities of Shambar Asura. You destroyed hundreds and thousands of heroes of the asura named Varchi. (5)