हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.99.4

मंडल 7 → सूक्त 99 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 99
उ॒रुं य॒ज्ञाय॑ चक्रथुरु लो॒कं ज॒नय॑न्ता॒ सूर्य॑मु॒षास॑म॒ग्निम् । दास॑स्य चिद्वृषशि॒प्रस्य॑ मा॒या ज॒घ्नथु॑र्नरा पृत॒नाज्ये॑षु ॥ (४)
हे इंद्र एवं विष्णु! तुम दोनों ने सूर्य, उषा एवं अग्नि को उत्पन्न करके यजमान के लिए विस्तृत स्वर्गलोक को बनाया है. हे नेताओ! तुमने वृषशिप्र नामक दास की मायाओं को युद्धों में समाप्त कर दिया था. (४)
O Indra and Vishnu! Both of you have created the sun, usha and agni and created a wide paradise for the host. Hey leaders! You ended the maya of a dasa named Vrisshipra in wars. (4)