हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.1.13

मंडल 8 → सूक्त 1 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 1
मा भू॑म॒ निष्ट्या॑ इ॒वेन्द्र॒ त्वदर॑णा इव । वना॑नि॒ न प्र॑जहि॒तान्य॑द्रिवो दु॒रोषा॑सो अमन्महि ॥ (१३)
हे इंद्र! तुम्हारी कृपा से हम क्षीण, दुःखी एवं शाखाहीन वनों के समान संतानहीन न हों. हे वज्रधारी इंद्र! हम घरों में रहते हुए तुम्हारी स्तुति करें. (१३)
O Indra! By your grace, let us not be as childless as weak, sorrowful and branchless forests. O thunderbolt Indra! We praise you while we are at home. (13)