हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.1.14

मंडल 8 → सूक्त 1 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 1
अम॑न्म॒हीद॑ना॒शवो॑ऽनु॒ग्रास॑श्च वृत्रहन् । स॒कृत्सु ते॑ मह॒ता शू॑र॒ राध॑सा॒ अनु॒ स्तोमं॑ मुदीमहि ॥ (१४)
हे वृत्रहंता इंद्र! हम धीरे-धीरे, उग्रतारहित एवं भक्ति व श्रद्धापूर्वक हविरूप महान्‌ धन के साथ तुम्हारी स्तुति बोलेंगे. (१४)
O Vrithrahanta Indra! We will speak your praises slowly, without resentment and with devotion and reverence. (14)