हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.1.24

मंडल 8 → सूक्त 1 → श्लोक 24 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 1
आ त्वा॑ स॒हस्र॒मा श॒तं यु॒क्ता रथे॑ हिर॒ण्यये॑ । ब्र॒ह्म॒युजो॒ हर॑य इन्द्र के॒शिनो॒ वह॑न्तु॒ सोम॑पीतये ॥ (२४)
हे इंद्र! ब्रहम से युक्त सैकड़ों और हजारों घोड़े सोमरस पीने के लिए तुम्हें सोने के बने रथ पर ढोवें. (२४)
O Indra! Hundreds and thousands of horses containing brahmas should drink somras to carry you on a chariot made of gold. (24)