हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.1.25

मंडल 8 → सूक्त 1 → श्लोक 25 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 1
आ त्वा॒ रथे॑ हिर॒ण्यये॒ हरी॑ म॒यूर॑शेप्या । शि॒ति॒पृ॒ष्ठा व॑हतां॒ मध्वो॒ अन्ध॑सो वि॒वक्ष॑णस्य पी॒तये॑ ॥ (२५)
मोर के रंग वाले एवं सफेद पीठ वाले घोड़े स्तुतियोग्य मधुर सोमरस पीने के लिए इंद्र को सोने के बने रथ में बैठा कर ढोवें. (२५)
Peacock-colored and white-backed horses should carry Indra in a chariot made of gold to drink the praiseworthy sweet somras. (25)