हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.1.26

मंडल 8 → सूक्त 1 → श्लोक 26 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 1
पिबा॒ त्व१॒॑स्य गि॑र्वणः सु॒तस्य॑ पूर्व॒पा इ॑व । परि॑ष्कृतस्य र॒सिन॑ इ॒यमा॑सु॒तिश्चारु॒र्मदा॑य पत्यते ॥ (२६)
हे स्तुतियों द्वारा प्रशंसनीय इंद्र! तुम सर्वप्रथम सोमरस पीने वाले की तरह निचोड़े हुए सोमरस को पिओ. यह शुद्ध, रसीला, नशीला एवं सुंदर सोमरस नशा उत्पन्न करने के लिए ही बनाया गया है. (२६)
O Indra admirable by the praises! You first drink the squeezed somras like a somras drinker. It is designed only to produce pure, lush, intoxicating and beautiful somras intoxication. (26)