हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 10
यत्स्थो दी॒र्घप्र॑सद्मनि॒ यद्वा॒दो रो॑च॒ने दि॒वः । यद्वा॑ समु॒द्रे अध्याकृ॑ते गृ॒हेऽत॒ आ या॑तमश्विना ॥ (१)
हे अश्चिनीकुमारो! चाहे तुम प्रशंसनीय यज्ञशालाओं वाले मर्त्यलोक में रहते होओ तथा द्युलोक के दीप्तिशाली भाग में अथवा आकाश में निवास करते हो. तुम इन स्थानों से हमारे पास आओ. (१)
O aschinikumaro! Whether you live in the mortallokas with praiseworthy yagyashalas and dwell in the radiant part of the doloka or in the sky. You come to us from these places. (1)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 10
यद्वा॑ य॒ज्ञं मन॑वे सम्मिमि॒क्षथु॑रे॒वेत्का॒ण्वस्य॑ बोधतम् । बृह॒स्पतिं॒ विश्वा॑न्दे॒वाँ अ॒हं हु॑व॒ इन्द्रा॒विष्णू॑ अ॒श्विना॑वाशु॒हेष॑सा ॥ (२)
हे अश्विनीकुमारो! तुम लोगों ने जिस प्रकार मनु के लिए यज्ञ को सफल बनाया था, उसी प्रकार कण्व के यज्ञ को भी समझो. मैं बृहस्पति सभी देवों, इंद्र, विष्णु एवं गतिशील अश्चों वाले अश्विनीकुमारों को बुलाता हूं. (२)
O Ashwinikumaro! Just as you made the yajna a success for Manu, so also understand the yajna of Kanva. I call Jupiter all the gods, Indra, Vishnu and Ashwinikumaras with dynamic asshyas. (2)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 10
त्या न्व१॒॑श्विना॑ हुवे सु॒दंस॑सा गृ॒भे कृ॒ता । ययो॒रस्ति॒ प्र णः॑ स॒ख्यं दे॒वेष्वध्याप्य॑म् ॥ (३)
मैं शोभन कर्म वाले एवं हमारा हविष्य स्वीकार करने के लिए प्रकट होने वाले अश्वरिनीकुमारों को बुलाता हूं. अश्विनीकुमारों की मित्रता सभी देवों में उत्तम मानी जाती है. (३)
I call the Ashvrinikumaras who are in shodhan karma and who appear to accept our wishes. The friendship of the Ashwinikumars is considered to be the best of all the gods. (3)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 10
ययो॒रधि॒ प्र य॒ज्ञा अ॑सू॒रे सन्ति॑ सू॒रयः॑ । ता य॒ज्ञस्या॑ध्व॒रस्य॒ प्रचे॑तसा स्व॒धाभि॒र्या पिब॑तः सो॒म्यं मधु॑ ॥ (४)
यज्ञ जिन अश्िनीकुमारों को वश में रखते हैं एवं बिना स्तोताओं वाले देश में भी जिनकी स्तुति होती है, वे यज्ञ के उत्तम जानकार हैं. वे स्वधा शब्दों के साथ मधुर सोमरस पिएं. (४)
The ashinikumaras who are subdued by the yajna and who are praised even in a country without hymns are well versed in yajna. They drink sweet somras with swadha words. (4)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 10
यद॒द्याश्वि॑ना॒वपा॒ग्यत्प्राक्स्थो वा॑जिनीवसू । यद्द्रु॒ह्यव्यन॑वि तु॒र्वशे॒ यदौ॑ हु॒वे वा॒मथ॒ मा ग॑तम् ॥ (५)
हे अन्न एवं धन के स्वामी आश्विनीकुमारो! इस समय तुम लोग चाहे पूर्व दिशा में होओ, चाहे पश्चिमी दिशा में, चाहे द्रुहयु, अनु, तुर्वशु एवं यदु राजा के पास हो मैं तुम्हें वहीं से बुलाता हूं. तुम मेरे पास आओ. (५)
O Swami of food and wealth, Ashwinikumars! At this time, whether you are in the east direction, whether in the west direction, whether you are with Druhyu, Anu, Turvasu and Yadu king, I call you from there. You come to me. (5)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 10
यद॒न्तरि॑क्षे॒ पत॑थः पुरुभुजा॒ यद्वे॒मे रोद॑सी॒ अनु॑ । यद्वा॑ स्व॒धाभि॑रधि॒तिष्ठ॑थो॒ रथ॒मत॒ आ या॑तमश्विना ॥ (६)
हे अधिक हवि भक्षण करने वाले अश्चिनीकुमारो! तुम चाहे अंतरिक्ष में गमन करते होओ अथवा द्यावा-पृथिवी की ओर जा रहे होओ, अथवा तेजरूपी रथ पर बैठे होओ, इन सभी स्थानों से आओ. (६)
O more hungry ashchinikumaro! Whether you are walking in space or going towards Dyava-Prithvivi, or sitting on a bright chariot, come from all these places. (6)