हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.10.1

मंडल 8 → सूक्त 10 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 10
यत्स्थो दी॒र्घप्र॑सद्मनि॒ यद्वा॒दो रो॑च॒ने दि॒वः । यद्वा॑ समु॒द्रे अध्याकृ॑ते गृ॒हेऽत॒ आ या॑तमश्विना ॥ (१)
हे अश्चिनीकुमारो! चाहे तुम प्रशंसनीय यज्ञशालाओं वाले मर्त्यलोक में रहते होओ तथा द्युलोक के दीप्तिशाली भाग में अथवा आकाश में निवास करते हो. तुम इन स्थानों से हमारे पास आओ. (१)
O aschinikumaro! Whether you live in the mortallokas with praiseworthy yagyashalas and dwell in the radiant part of the doloka or in the sky. You come to us from these places. (1)