ऋग्वेद (मंडल 8)
इ॒दं ह॑ नू॒नमे॑षां सु॒म्नं भि॑क्षेत॒ मर्त्यः॑ । आ॒दि॒त्याना॒मपू॑र्व्यं॒ सवी॑मनि ॥ (१)
इस समय अदितिपुत्र देवों की प्रेरणा से स्तोता अभिनव सुख की याचना करें. (१)
At this time, with the inspiration of the Aditiputra Devas, ask for the innovative happiness of The Stota. (1)
ऋग्वेद (मंडल 8)
अ॒न॒र्वाणो॒ ह्ये॑षां॒ पन्था॑ आदि॒त्याना॑म् । अद॑ब्धाः॒ सन्ति॑ पा॒यवः॑ सुगे॒वृधः॑ ॥ (२)
इन अदितिपुत्रों के मार्ग दूसरों के गमन से रहित एवं हिंसाशून्य हैं. वे मार्ग पालन करने वाले और सुखवर्धक हैं. (२)
The paths of these sons of Aditi are devoid of the movement of others and violenceless. They are path-keepers and comforters. (2)
ऋग्वेद (मंडल 8)
तत्सु नः॑ सवि॒ता भगो॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । शर्म॑ यच्छन्तु स॒प्रथो॒ यदीम॑हे ॥ (३)
हम जिस विस्तृत सुख की याचना करते हैं, वही हमें सविता, भग, वरुण, मित्र एवं अर्यमा दें. (३)
Give us Savita, Bhaga, Varuna, Friends and Aryama for the wide happiness we ask for. (3)
ऋग्वेद (मंडल 8)
दे॒वेभि॑र्देव्यदि॒तेऽरि॑ष्टभर्म॒न्ना ग॑हि । स्मत्सू॒रिभिः॑ पुरुप्रिये सु॒शर्म॑भिः ॥ (४)
हे देवि अदिति! तुम जिसका भरण करती हो, उसकी कोई हिंसा नहीं कर सकता. तुम बहुतों को प्रिय हो. तुम शोभन सुख वाले एवं बुद्धिमान् देवों के साथ भली प्रकार आओ. (४)
O Devi Aditi! No one can do violence to what you fill. You're dear to many. You may well come with the god of happiness and wisdom. (4)
ऋग्वेद (मंडल 8)
ते हि पु॒त्रासो॒ अदि॑तेर्वि॒दुर्द्वेषां॑सि॒ योत॑वे । अं॒होश्चि॑दुरु॒चक्र॑योऽने॒हसः॑ ॥ (५)
अदिति के वे पुत्र द्वेषी राक्षसों को अलग करना जानते हैं. बड़े-बड़े कामों को करने वाले एवं रक्षक देव हमें पाप से अलग करना चाहते हैं. (५)
Aditi's sons know how to separate malicious demons. God, who does great things and protectors, wants to separate us from sin. (5)
ऋग्वेद (मंडल 8)
अदि॑तिर्नो॒ दिवा॑ प॒शुमदि॑ति॒र्नक्त॒मद्व॑याः । अदि॑तिः पा॒त्वंह॑सः स॒दावृ॑धा ॥ (६)
अदिति दिन में हमारे पशुओं की रक्षा करें. बाहर एवं भीतर से समान रहने वाली अदिति रात में हमारे पशुओं की रक्षा करें. वे हमें सदा बढ़ने वाले पाप से बचावें. (६)
Aditi protect our animals during the day. Aditi, who lives the same from the outside and inside, protect our animals at night. They protect us from the ever-growing sin. (6)
ऋग्वेद (मंडल 8)
उ॒त स्या नो॒ दिवा॑ म॒तिरदि॑तिरू॒त्या ग॑मत् । सा शंता॑ति॒ मय॑स्कर॒दप॒ स्रिधः॑ ॥ (७)
स्तुति के योग्य वे अदिति अपने रक्षासाधनों द्वारा दिन में हमारे पास आवें, हमें शांतिदाता सुख दें एवं हमारे बाधकों को दूर करें. (७)
May those Aditis, worthy of praise, come to us during the day through her protective means, give us peace-giving happiness and remove our barriers. (7)
ऋग्वेद (मंडल 8)
उ॒त त्या दैव्या॑ भि॒षजा॒ शं नः॑ करतो अ॒श्विना॑ । यु॒यु॒याता॑मि॒तो रपो॒ अप॒ स्रिधः॑ ॥ (८)
देवों के प्रसिद्ध वैद्य अश्विनीकुमार हमें सुख दें, हमसे पाप को हटावें एवं शत्रुओं को दूर भगावें. (८)
May the famous physician of the gods, Ashwinikumar, give us happiness, remove sin from us and drive away the enemies. (8)