हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.19.12

मंडल 8 → सूक्त 19 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 19
विप्र॑स्य वा स्तुव॒तः स॑हसो यहो म॒क्षूत॑मस्य रा॒तिषु॑ । अ॒वोदे॑वमु॒परि॑मर्त्यं कृधि॒ वसो॑ विवि॒दुषो॒ वचः॑ ॥ (१२)
हे बल से युक्त एवं निवासस्थान देने वाले अग्नि! बुद्धिमान्‌ स्तोता के हव्यदान में यज्ञकर्ता का वचन देवों के नीचे एवं मानवों के ऊपर करो. (१२)
O agni with force and giving abode! In the salutationof the wise hymn, make the word of the yajnakar under the gods and upon the human beings. (12)