हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.19.2

मंडल 8 → सूक्त 19 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 19
विभू॑तरातिं विप्र चि॒त्रशो॑चिषम॒ग्निमी॑ळिष्व य॒न्तुर॑म् । अ॒स्य मेध॑स्य सो॒म्यस्य॑ सोभरे॒ प्रेम॑ध्व॒राय॒ पूर्व्य॑म् ॥ (२)
हे मेधावी सौभरि! अधिक देने वाले, विचित्र-दीप्तिसंपन्न इस सोमसाध्य यज्ञ के नियंता एवं पुरातन अग्नि की स्तुति यज्ञपूर्ति के लिए करो. (२)
O bright hundred! Praise the ancient agni and the controller of this more-giving, strange-glowing somasadhya yajna for the fulfillment of the yajna. (2)