ऋग्वेद (मंडल 8)
ईळे॑ गि॒रा मनु॑र्हितं॒ यं दे॒वा दू॒तम॑र॒तिं न्ये॑रि॒रे । यजि॑ष्ठं हव्य॒वाह॑नम् ॥ (२१)
प्रजापति मनु द्वारा स्थापित अग्नि की मैं स्तुति करता हूं. सर्वाधिक यज्ञकर्ता, हव्य वहन करने वाले एवं ईश्वर अग्नि को देवों ने दूत बनाकर भेजा. (२१)
I praise the agni founded by Prajapati Manu. The most sacrificing, the human-bearer and the God agni were sent as messengers by the gods. (21)