हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.2.40

मंडल 8 → सूक्त 2 → श्लोक 40 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 2
इ॒त्था धीव॑न्तमद्रिवः का॒ण्वं मेध्या॑तिथिम् । मे॒षो भू॒तो॒३॒॑ऽभि यन्नयः॑ ॥ (४०)
हे वज्रधारी इंद्र! तुमने बादल के रूप में गति करते हुए सामने जाकर कण्व के पुत्र मेधातिथि ऋषि को प्राप्त किया था. (४०)
O thunderbolt Indra! You went in front of you, moving as a cloud and received the sage Medhathithi, the son of Kanva. (40)