ऋग्वेद (मंडल 8)
अग्ने॒ तव॒ त्ये अ॑ज॒रेन्धा॑नासो बृ॒हद्भाः । अश्वा॑ इव॒ वृष॑णस्तविषी॒यवः॑ ॥ (११)
हे जरारहित अग्नि! तुम्हारी दीप्ति वाली एवं विशाल रश्मियां कामवर्षी अश्व के समान शक्ति प्रदर्शित करती हैं. (११)
O unhindered agni! Your radiant and huge rashmis display the same power as a working horse. (11)