हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.23.26

मंडल 8 → सूक्त 23 → श्लोक 26 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 23
म॒हो विश्वा॑ँ अ॒भि ष॒तो॒३॒॑ऽभि ह॒व्यानि॒ मानु॑षा । अग्ने॒ नि ष॑त्सि॒ नम॒साधि॑ ब॒र्हिषि॑ ॥ (२६)
हे स्तुति योग्य अग्नि! सभी महान्‌ स्तोताओं के सामने तुम कुशों पर बैठो एवं मानवों का हव्य स्वीकार करो. (२६)
O agni of praise! Sit on the cushions in front of all the great hymns and accept the greetings of the human beings. (26)