हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.23.30

मंडल 8 → सूक्त 23 → श्लोक 30 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 23
अग्ने॒ त्वं य॒शा अ॒स्या मि॒त्रावरु॑णा वह । ऋ॒तावा॑ना स॒म्राजा॑ पू॒तद॑क्षसा ॥ (३०)
हे अग्नि! तुम यशस्वी हो. तुम यज्ञयुक्त, भली प्रकार दीप्तिशाली एवं युद्ध बल वाले मित्र व वरुण को इस यज्ञ में ले आओ. (३०)
O agni! You are successful. You bring the sacrificial, well-lit and war-strong friend and Varuna to this yagna. (30)