ऋग्वेद (मंडल 8)
ते नो॑ ना॒वमु॑रुष्यत॒ दिवा॒ नक्तं॑ सुदानवः । अरि॑ष्यन्तो॒ नि पा॒युभिः॑ सचेमहि ॥ (११)
हे शोभन-दान वाले एवं अहिंसित मरुतो! तुम रात-दिन हमारी नाव की रक्षा करो तुम्हारे पालन से हम एकत्र होंगे. (११)
O blessed and non-violent Maruto! Protect our boat day and night, by your observance we will gather. (11)