हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
ता वां॒ विश्व॑स्य गो॒पा दे॒वा दे॒वेषु॑ य॒ज्ञिया॑ । ऋ॒तावा॑ना यजसे पू॒तद॑क्षसा ॥ (१)
हे सब लोक के रक्षक, दिव्य गुणयुक्त एवं देवों में यज्ञपात्र मित्र व वरुण! तुम हव्यदान के लिए यजमान के समीप आओ]. है व्यश्च ऋषि! तुम यज्ञयुक्त एवं पवित्र शक्ति वाले मित्र व वरुण का यजन करो. (१)
O protector of all the people, having divine qualities and sacrificial friends and Varuna among the gods! Come to the host for the gift of the greetings.' It's a sage! You should worship the sacrificial and holy-powered friend and Varuna. (1)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
मि॒त्रा तना॒ न र॒थ्या॒३॒॑ वरु॑णो॒ यश्च॑ सु॒क्रतुः॑ । स॒नात्सु॑जा॒ता तन॑या धृ॒तव्र॑ता ॥ (२)
शोभन-यज्ञकर्म वाले मित्र व वरुण धन एवं रथ के स्वामी हैं. वे बहुत समय पूर्व शोभन जन्म वाले, अदितिपुत्र एवं व्रतधारी हैं. (२)
The friends of Shobhan-Yajnakarma and Varuna are the masters of wealth and chariots. He is a long time ago, born shobhan, aditiputra and vratdhari. (2)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
ता मा॒ता वि॒श्ववे॑दसासु॒र्या॑य॒ प्रम॑हसा । म॒ही ज॑जा॒नादि॑तिरृ॒ताव॑री ॥ (३)
महती एवं सत्ययुक्त अदिति ने सबको जानने वाले, उत्कृष्ट तेज वाले मित्र व वरुण को असुरनाश करने वाली शक्ति के लिए उत्पन्न किया है. (३)
Aditi, who is a great and truthful, has created the power to know everyone, a friend of excellent speed and to asuras that will destroy Varun. (3)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
म॒हान्ता॑ मि॒त्रावरु॑णा स॒म्राजा॑ दे॒वावसु॑रा । ऋ॒तावा॑नावृ॒तमा घो॑षतो बृ॒हत् ॥ (४)
महान्‌, भली प्रकार सुशोभित, शक्तिशाली एवं सत्ययुक्त मित्र व वरुण अपने प्रकाश से यज्ञ को प्रकाशित करते हैं. (४)
Great, well-groomed, powerful and truthful friends and Varuna illuminate the yajna with his light. (4)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
नपा॑ता॒ शव॑सो म॒हः सू॒नू दक्ष॑स्य सु॒क्रतू॑ । सृ॒प्रदा॑नू इ॒षो वास्त्वधि॑ क्षितः ॥ (५)
महान्‌ बल के नाती, वेग के पुत्र, शोभन कर्म वाले एवं अधिक धन देने वाले मित्र व वरुण अन्न के स्थान में रहते हैं. (५)
Mahanbal's grandson, The Son of Veg, friends with shodhan karma and high-money givers and Varun live in the place of Food. (5)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
सं या दानू॑नि ये॒मथु॑र्दि॒व्याः पार्थि॑वी॒रिषः॑ । नभ॑स्वती॒रा वां॑ चरन्तु वृ॒ष्टयः॑ ॥ (६)
हे मित्र व वरुण! तुम धन, दिव्य अन्न एवं धरती पर उत्पन्न होने वाला अन्न देते हो. जल वाली वर्षा तुम्हारे पास रहे. (६)
Oh my friend and Varun! You give wealth, divine food and food that is produced on earth. The rain with water stay with you. (6)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
अधि॒ या बृ॑ह॒तो दि॒वो॒३॒॑ऽभि यू॒थेव॒ पश्य॑तः । ऋ॒तावा॑ना स॒म्राजा॒ नम॑से हि॒ता ॥ (७)
हे सत्ययुक्त, भली प्रकार सुशोभित एवं हव्य को प्रेम करने वाले मित्र व वरुण! तुम देवों को प्रसन्न करने के लिए इस प्रकार देखते हो, जिस प्रकार बैल गायों के झुंड को देखता है. (७)
O true, well-groomed and loving friend and Varuna! You look at the gods to please them in this way, just as the bull sees the flock of cows. (7)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
ऋ॒तावा॑ना॒ नि षे॑दतुः॒ साम्रा॑ज्याय सु॒क्रतू॑ । धृ॒तव्र॑ता क्ष॒त्रिया॑ क्ष॒त्रमा॑शतुः ॥ (८)
सत्ययुक्त एवं शोभन कर्म वाले मित्र व वरुण! भली प्रकार सुशोभित होने के लिए यहां बैठो. हे व्रत धारण करने वाले एवं शक्तिशाली मित्र व वरुण! तुम बल को प्राप्त करो. (८)
Friends and Varun with true and good deeds! Sit here to be well-groomed. O fasting and powerful friend and Varuna! You get to the force. (8)
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